Thursday, February 22, 2018

Urdu

Kaano'n me shahad gholta hai
Jab koi shakhs Urdu bolta hai

Wednesday, February 21, 2018

नज़र

जिस पे सबकी नज़र थी काबिज, वो प्यार था,
छुपा जो था उसे हम ज़ख्म कह गए!

मोहब्बत से इश्क तक....

काफी था, की मोहब्बत की मैने शायद,
इश्क क्या हुआ, दुनिया खिलाफ कर ली मैने!

Tuesday, February 20, 2018

राबता

राबता रखो, कि रिश्ता खत्म नही होता!
चले जाते है मुसाफिर, पर रस्ता खत्म नही होता!

वक़्त मिले तो गुज़र लो उस रास्ते पे,
कि किसी का इंतेजार तेरे बिन पूरा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

पिये जाते है शराब और खडे रहते है,
कि उस पानी का नशा है खत्म नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

कोशिश रहेगी बाकी के कुछ पल मेरे लिए रोंक लो,
लेकिन तेरी कोशिश पे नाजाने क्यू भारोस सा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

जन्नत का फरमां

सुना है जन्नत से उसका फरमां आया है
ज़िसमे दोनो तरफ के फरिश्तो का नाम आया है !

यहां मिल पाना है मुशकिल, जानता  है. 
इसलिय नयी शुरुआत का आगाज़ आया है!

काफिरो की कतार

काफिरो की कतार आज कुछ ज्यादा लम्बी दिखी,
खुदा तो हमने भी उन्हे बना दिया था.

इतने हुए करीब कि दूर हो गए

पा लिया वो जो कभी पा ना सके थे ,
खो रहे है जो संग ले कर चले थे!

शिद्धात से करी प्यार की राह में वफ़ा ,
पता ना चला कब हम बेवफा हो गए!

क्यू ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए ,
इतने हुए करीब कि दूर हो गए!

दर्द को आज फिर जुबां दी जाए

स्याही कलम लाओ, शायरी लिखी जाए,
बीते हुए दर्द को आज फिर जुबां दी जाए!

अलविदा

अलविदा कह गए, कुछ तो सोच कर
आँखे तो रोई होंगी ये फसाना देख कर !

उडान

मेरी फिक्र और उनकी उडान बस इतनी ही थी ,
बाहों में सिमटे वो किसी और के, और यादे मेरी थी!

Thursday, January 25, 2018

ज़ामाना

कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है 
हम तो घुल गए इस मानिन्द उनमे, बेमुरव्वत फिर भी शर्बत से उसकी मिठास मांगता है
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

वक़्त क्या, ये सांसे तक कर दी मेहर उनको, ज़ुल्म की इंतिहा देख - मगरूर मेरी ज़िन्दगी मांगता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

अब तो ली है टक्कर सीधे उस ज़माने से, देखते है कौन जीता और कौन अफसाना बन जाता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है......