Tuesday, February 20, 2018

राबता

राबता रखो, कि रिश्ता खत्म नही होता!
चले जाते है मुसाफिर, पर रस्ता खत्म नही होता!

वक़्त मिले तो गुज़र लो उस रास्ते पे,
कि किसी का इंतेजार तेरे बिन पूरा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

पिये जाते है शराब और खडे रहते है,
कि उस पानी का नशा है खत्म नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

कोशिश रहेगी बाकी के कुछ पल मेरे लिए रोंक लो,
लेकिन तेरी कोशिश पे नाजाने क्यू भारोस सा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......

No comments: