Thursday, January 25, 2018

ज़ामाना

कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है 
हम तो घुल गए इस मानिन्द उनमे, बेमुरव्वत फिर भी शर्बत से उसकी मिठास मांगता है
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

वक़्त क्या, ये सांसे तक कर दी मेहर उनको, ज़ुल्म की इंतिहा देख - मगरूर मेरी ज़िन्दगी मांगता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

अब तो ली है टक्कर सीधे उस ज़माने से, देखते है कौन जीता और कौन अफसाना बन जाता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है......

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