वो धागा किसी मज़ार पे,
बंधा रह गया किसी की फिराक में!
Sunday, January 20, 2019
Thursday, February 22, 2018
Wednesday, February 21, 2018
Tuesday, February 20, 2018
राबता
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म नही होता!
चले जाते है मुसाफिर, पर रस्ता खत्म नही होता!
वक़्त मिले तो गुज़र लो उस रास्ते पे,
कि किसी का इंतेजार तेरे बिन पूरा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......
पिये जाते है शराब और खडे रहते है,
कि उस पानी का नशा है खत्म नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......
कोशिश रहेगी बाकी के कुछ पल मेरे लिए रोंक लो,
लेकिन तेरी कोशिश पे नाजाने क्यू भारोस सा नही होता!
राबता रखो, कि रिश्ता खत्म.......
जन्नत का फरमां
सुना है जन्नत से उसका फरमां आया है
ज़िसमे दोनो तरफ के फरिश्तो का नाम आया है !
यहां मिल पाना है मुशकिल, जानता है.
इसलिय नयी शुरुआत का आगाज़ आया है!
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