Tuesday, February 20, 2018

काफिरो की कतार

काफिरो की कतार आज कुछ ज्यादा लम्बी दिखी,
खुदा तो हमने भी उन्हे बना दिया था.

इतने हुए करीब कि दूर हो गए

पा लिया वो जो कभी पा ना सके थे ,
खो रहे है जो संग ले कर चले थे!

शिद्धात से करी प्यार की राह में वफ़ा ,
पता ना चला कब हम बेवफा हो गए!

क्यू ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए ,
इतने हुए करीब कि दूर हो गए!

दर्द को आज फिर जुबां दी जाए

स्याही कलम लाओ, शायरी लिखी जाए,
बीते हुए दर्द को आज फिर जुबां दी जाए!

अलविदा

अलविदा कह गए, कुछ तो सोच कर
आँखे तो रोई होंगी ये फसाना देख कर !

उडान

मेरी फिक्र और उनकी उडान बस इतनी ही थी ,
बाहों में सिमटे वो किसी और के, और यादे मेरी थी!

Thursday, January 25, 2018

ज़ामाना

कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है 
हम तो घुल गए इस मानिन्द उनमे, बेमुरव्वत फिर भी शर्बत से उसकी मिठास मांगता है
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

वक़्त क्या, ये सांसे तक कर दी मेहर उनको, ज़ुल्म की इंतिहा देख - मगरूर मेरी ज़िन्दगी मांगता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद.......

अब तो ली है टक्कर सीधे उस ज़माने से, देखते है कौन जीता और कौन अफसाना बन जाता है 
कुछ नया है ज़ामाना शायद, या कुछ बेवाफा सा है......